Parad

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पारद साक्षात शिव है. सिद्ध पारद यमांतक अर्थात मृत्यु का नाश करने वाला और कच्चा पारद प्राणग्राहक अर्थात प्रलयंकारी है. सिद्ध पारद दर्शन एवं पूजन, धारण और भक्षण के लिये महा कल्याणकारी माना गया है. पारद शिवलिंग जो की गंधक वेदी पर आसीन हो करोड़ो पुण्यों का प्रदाता कहा गया है. इसके दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. इसी प्रकार सिद्ध पारद से बनी अन्य वस्तुएं जैसे की पारद मुद्रिका, पारद पेंडेंट, पारद गुटिका, पारद पिरामिड, पारद लक्ष्मी गणेश, पारद पात्र और पारद श्रीयंत्र के उपचार उपयोग चमत्कारिक लाभ देने वाले हैं. ब्रह्म वैवर्त पुराण, लिंग पुराण, स्कंद पुराण, रस रत्नाकर, निघंटु प्रकाश, शिवनिर्णय रत्नाकर आदि प्राचीन भारतीय ग्रंथ सिद्ध पारद की महिमा गाते नहीं थकते. आज के व्यस्त युग में जहां मनुष्य के लिये जटिल और विधिसम्मत पूजापाठ करना और करवाना मुश्किल सा हो गया है. ऐसे में सिद्ध पारद का दर्शन, धारण एवं अन्य उपयोग सुखी और समृद्ध जीवन के लिये अमोघ उपाय है.

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पारद मुद्रिका

पारद मुद्रिका नवग्रह शांति के लिए धारण की जाती है. इस मुद्रिका की विशेषता है की जिस भी ग्रह का संकल्प लेकर इसे धारण किया जाता है यह उसी के अनुरूप परिणाम देती है. किसी विशेष ग्रह के फल को अनुकूल करने के साथ साथ यह सभी नवग्रहों को संतुलित करने की क्षमता रखती है.

पारद मुद्रिका

पारद पेंडेंट

पारद सिद्धि के बारह संस्कारों से सिद्ध किया गया पारद पेंडेंट एक बहुत ही उपयोगी पेंडेंट है. इसे गले में धारण किया जाता है. शरीर से निरंतर संपर्क में रहने वाला यह पेंडेंट ह्रदय को अपूर्व बल देता है. सभी प्रकार की नकारात्मकता को नष्ट कर पारद पेंडेंट एक नये जोश और उत्साह द्वारा व्यक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है. इसे धारण कर स्नान करने से दिव्य पारद स्नान का फल प्राप्त होता है.

पारद पेंडेंट

पारद गुटिका

पारद सिद्धि के सौलह संस्कारों द्वारा निर्मित पारद गुटिका एक अद्भुत वस्तु है. इसे रात भर जलपात्र में रख सुबह उस जल को पी लिया जाता है. इस प्रकार सिद्ध पारद गुटिका के संपर्क में आया जल दिव्य औषधि गुणों में परिवर्तित हो कायाकल्प कर देता है. सिद्ध पारद भक्षण प्रक्रिया का यह एक प्रकार है. इसके निरंतर सेवन से जरा एवं व्याधि का नाश होता है और शरीर, मन, बुद्धि निर्मल हो जाते हैं.

पारद गुटिका

पारद पात्र

पारद सिद्धि के सौलह संस्कारों से सिद्ध पारद पात्र सिद्ध पारद भक्षण के लिए श्रेष्ठ उपाय है. पुराने समय में राजा महाराजा इसका प्रयोग कर स्वयं को अधिक से अधिक ऊर्जावान रखते थे. इस पात्र में रखा जल जरा और व्याधि को नष्ट कर व्यक्ति में अपूर्व ऊर्जा और निर्मलता का संचार करता है. भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.

पारद पात्र