Rudraksh

Rudraksh

रुद्राक्ष को हिन्दू मान्यता अनुसार बहुत पवित्र और पापनाशक माना गया है. इसे भगवान शिव का साक्षात आशीर्वाद कहा गया है. पौराणिक साहित्य में इसकी उत्पत्ति का स्रोत्र भगवान शिव के अश्रुओं द्वारा बताया गया है. रुद्राक्ष एक मात्र फल है जिसे धारण किया जाता है. वैज्ञानिकों का भी कहना है की रुद्राक्ष में विचित्र चुंबकीय शक्ति विद्यमान है. यह व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देता है. आयुर्वेद में भी रुद्राक्ष की बड़ी महिमा है. इसके सेवन से अनेक असाध्य रोगों का शमन किया जा सकता है. रुद्राक्ष का मुख्य उत्पादक क्षेत्र नेपाल है. इसके अलावा भारत, तिब्बत, इंडोनेशिया, चीन, मलेशिया, जावा और सुमात्रा में भी यह पैदा होता है. मुख्यतया एक से चौदह मुखी तक रुद्राक्ष पाये जाते हैं. प्रत्येक का अपना गुणधर्म है.

Rudraksh

एक मुखी रुद्राक्ष

यह साक्षात शिव माना गया है. सकल मनोरथ पूरे करता है. कहतें हैं इसके दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. इसे धारण करने या घर में रखने से सभी क्लेशों का नाश होकर सुखसमृद्धि में वृद्धि होती है.

एक मुखी रुद्राक्ष

दो मुखी रुद्राक्ष

इसे देव देवेश्वर कहा गया है. मनोकामना पूर्ण करता है. इसके धारण करने से पुण्यों में वृद्धि आरंभ हो जाती है.

दो मुखी रुद्राक्ष

तीन मुखी रुद्राक्ष

यह त्रिदेव का प्रतीक है. विद्या प्राप्ति के लिये इसे धारण करना आदर्श है. इसे धारण करने से मार्ग में आ रही अड़चनों का नाश हो जाता है. लक्ष्य प्राप्ति के नये साधन प्राप्त होने लगते हैं.

तीन मुखी रुद्राक्ष

चार मुखी रुद्राक्ष

यह ब्रह्मा का प्रतीक है. जघन्य पाप भी इसके स्पर्श मात्र से नष्ट हो जाते हैं. इसे धारण करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

चार मुखी रुद्राक्ष

पंच मुखी रुद्राक्ष

यह साक्षात रूद्र है. सर्वत्र सर्व सुलभ यह रुद्राक्ष कीर्ति प्रदाता है. समस्त प्रकार की नकारात्मकता इसे धारण करने से नष्ट हो जाती है. इसे धारण करने से जीव को मुक्ति प्राप्त होती है.

पंच मुखी रुद्राक्ष

छह मुखी रुद्राक्ष

यह भगवान कार्तिकेय का प्रतीक है. इसे दाईं भुजा में धारण करने का विधान है. इसके धारण करने से बल और शक्ति का संचार होता है एवं समस्त भयों का नाश हो जाता है. साहस, ऊर्जा, विजय और ओज के लिये इसे धारण किया जाता है.

छह मुखी रुद्राक्ष

सात मुखी रुद्राक्ष

यह कामदेव का प्रतीक है. इसे धारण करने से दरिद्रता का नाश हो जाता है. जीवन में सौभाग्य का प्रवेश होता है. इसके धारणकर्ता को सभी प्रकार के ऐश्वर्य और भोगविलास की प्राप्ति संभव है.

सात मुखी रुद्राक्ष

आठ मुखी रुद्राक्ष

यह साक्षात भैरव है. भूत प्रेत और अशरीरी बाधाओं के उत्पात को शांत कर देता है. इसके धारण करने से अकाल मृत्यु अथवा शत्रुओं द्वारा धोखे से मारे जाने का भय नहीं रहता. धारणकर्ता को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

आठ मुखी रुद्राक्ष

नौ मुखी रुद्राक्ष

यह रुद्राक्ष सर्वेश्वर रूप है. इसे धारण करने से भाग्योदय होता है. इसे बाईं भुजा में धारण किया जाता है. इसके धारण करने से आत्मा के ज्ञान की सम्भावना निर्मित हो जाती है और मुक्ति की सम्भावना बनती है.

नौ मुखी रुद्राक्ष

दस मुखी रुद्राक्ष

यह साक्षात भगवान विष्णु है. आजीविका के संकट और अवरोध इसे धारण करने से नष्ट हो जाते हैं. जीवनयापन के नये अवसर प्राप्त हो जीवन सुखमय हो जाता है. मान सम्मान की प्राप्ति होती है. राज्य से कृपा प्राप्त होती है. धारणकर्ता सभी प्रकार के रोग , शोक और भयों से मुक्त हो परमसुखी हो जाता है.

दस मुखी रुद्राक्ष

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

यह ग्यारह रुद्रों का एकात्म रूप है. धारणकर्ता की सर्वत्र विजय होती है. दुर्लभ श्रेणी का रुद्राक्ष है. सकल मनोरथ पूर्ण कर देता है.

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

बारह मुखी रुद्राक्ष

यह भगवान सूर्य नारायण का प्रतीक है. इसे धारण करने से समस्त रोगों का नाश होता है. शारीरिक सौष्ठव और स्वास्थ्य उत्तम हो जाता है. धन धान्य में अपूर्व वृद्धि हो जाती है. शत्रुओं से अभेद्य सुरक्षा प्राप्त होती है. समाज में धारणकर्ता को मान सम्मान मिलता है.

बारह मुखी रुद्राक्ष

तेरह मुखी रुद्राक्ष

यह विश्वदेव का प्रतीक है. पाप और नकारात्मकता का नाश कर शुभता में वृद्धि कर देता है. इसके धारण करने से पुण्य कर्म सहज ही संपादित होने लगते हैं. साधना, सिद्धि और मनोरथ प्राप्ति के लिए इसका उपयोग अमोघ है. कामनायें पूर्ण कर देता है.

तेरह मुखी रुद्राक्ष

चौदह मुखी रुद्राक्ष

इसे शिवरूप माना गया है. परम कल्याणकारी गुणों वाला यह रुद्राक्ष मनचाही संतान और पुत्र प्रदाता है. अभावों को नष्ट कर जीवन को धन सम्पदा और समस्त सुखों से पूरित कर देता है.

चौदह मुखी रुद्राक्ष