Category Archives: विविध

मानव जीवन का आधार और अस्तित्व

मनुष्य जीवन को गतिमान करने वाले मुख्य रूप से सात तत्व हैं.
यह तत्व ही मानव जीवन का आधार हैं. मानव जीवन में साधारणतया ऐसा कुछ घटित नहीं होता जो इन तत्वों से बाहर हो. यह तत्व निम्न प्रकार से हैं –

1. काल
2. स्वभाव
3. नियति
4. इच्छा
5. भूत
6. योनि
7. पुरुषार्थ
इन्हें निम्न प्रकार समझा जा सकता है.

प्रात:कालीन भ्रमण ही पूर्ण लाभ देगा दोपहर का नहीं यह व्यक्ति की कालगत सीमा है.

कोई अपनी मातृ भाषा और दो एक अन्य भाषाएं ही बोल सकता है विश्व की तमाम भाषाएं नहीं यह व्यक्ति की स्वभावगत सीमा है.

भविष्य में व्यक्ति कुछ भी हो सकता है लेकिन बालक नहीं यह उसकी नियतिवादी सीमा है.

संकल्प से व्यक्ति कुछ भी प्राप्त कर लेता है यह व्यक्ति की इच्छागत सीमा है.

कोई जितना ऊंचा चंद्रमा पर उछल लेगा उतना पृथ्वी पर नहीं. यहां भौतिक विज्ञान के नियम कार्य करते हैं. यह भूतगत सीमा है.

अफ्रीकी दंपत्ति का बच्चा गोरा नहीं हो सकता यह व्यक्ति की योनिगत सीमा है.

किसी भी परिस्थिति को समझना और उससे ज्ञान और अनुभव के बल पर पार पाना पुरुषार्थ है. इसे कर्मवाद बनाम भाग्यवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. यह सर्वाधिक विरल तत्व है. इसे किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता.

लेकिन यह भी अटल सत्य है की इस जगत को एक रहस्यमयी शक्ति जिसे अस्तित्व , प्रकृति , ईश्वर आदि नामों से पुकारा जाता है नियंत्रित करती है.

यह शक्ति मानवीय क्रियाकलापों के प्रति अधिकतर तटस्थ ही रहती है क्योंकि इसने मनुष्य को विवेक रुपी उपकरण मार्गदर्शन के लिए दिया हुआ है.

परंतु मानवीय अभीप्सा और क्रंदन उसे हस्तक्षेप के लिए प्रेरित करते रहते हैं और उसका उपरोक्त सप्त तत्व समीकरण कभी किन्हीं मामलों में गड़बड़ा जाता है…

नोमोफोबिया / आज के युग की महामारी

83585038नोमोफोबिया आज के युग की सबसे खतरनाक महामारी है.

नो मोबाईल इन दो शब्दों से इस महामारी का नामकरण हुआ है.
आज संपूर्ण विश्व इस महामारी की चपेट में है. इसके लक्षण और परिणाम निम्न प्रकार से हैं –

1. मरीज सदा ऑनलाइन रहना चाहता है.
2. ऑफलाईन होते ही घबरा जाता है. आपा खोने लगता है.
3. स्टेटस , अपडेट्स , रिप्लाई , कमेंट्स और ऑनलाइन गेम्स खेलना ही जिंदगी के अहम काम रह जाते हैं.
4. जीवन की हर समस्या का हल इंटरनेट पर तलाशता है.
5. वास्तविक संसार की अनदेखी कर इंटरनेट पर मनचाही दुनिया का सृजन कर लेता है.
6. अपने द्वारा निर्मित भ्रामक दुनिया का भाग्य विधाता बन असीम सुख का अनुभव करता है.
7. सामाजिक संबंधों को वास्तविक रूप में ना जी पाने के कारण अपरिपक्वता का शिकार होता है.
8. सदा ऑनलाइन रहने की चेष्टा के चलते नींद पूरी नहीं होती.
9. नींद की कमी से स्मृतिनाश , चिड़चिड़ापन और अधीरता का शिकार हो जाता है.
10. सबसे खतरनाक मानसिक बीमारी ‘मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ (भिन्न व्यक्तित्व एक साथ जीना) का शिकार हो जाता है…

शाप और वरदान

जिन्दगी अजीब है

यहां वरदान शाप में बदल जाते हैं और शाप वरदान में.
राजा दशरथ तीन विवाह करने के उपरांत भी नि:संतान थे.
बूढ़े भी हो चले थे.

एक दिन अचानक शिकार खेलते उनके हाथो श्रवण कुमार मारा गया.
पुत्र शोक से व्याकुल श्रवण कुमार के माता पिता ने राजा दशरथ को शाप दे दिया की तुम भी हमारी तरह पुत्र वियोग में तड़प तड़प कर मरोगे.

यह शाप राजा के लिए मानो वरदान बन कर आया. अब पुत्र वियोग में मरने के लिए पुत्र तो चाहिए ही.
कालांतर में उन्हें चार पुत्रों की प्राप्ति हुई.

ऐसे ही कैकेई को राजा दशरथ से मिले दो वरदान कब अभिशाप में बदल गये उसे पता ही नहीं चला.
जब पता चला तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

अप्सरा उर्वशी के प्रणय निवेदन को ठुकरा अर्जुन उसके द्वारा दिये शाप का शिकार हो गया. उसे एक वर्ष की नपुंसकता का शाप मिला.
अर्जुन को मिला यह शाप पांडवों के लिये महा वरदान सरीखा था.
क्योंकि एकमात्र अर्जुन ही ऐसा था जिसे अज्ञातवास में स्वयं को छिपाना सबसे मुश्किल था.
इस शाप के फलस्वरूप अर्जुन बृहन्नला बन स्वयं को छिपाने में सफल रहा.

ऐसे ही ऋषि दुर्वासा द्वारा कुंती को दिया इच्छित देवता दर्शन वरदान कर्ण के रूप में उसके लिये अभिशाप बन गया. वह जीवन भर इस वरदान के कारण तिल तिल मरती रही.

भीष्म को पिता से मिला इच्छा मृत्यु वरदान भी उनके गले की फांस बन गया.
इस वरदान स्वरुप उनसे ना उगलते बनता था ना निगलते.
पूरा जीवन यह महारथी अमरत्व के वरदान को एक शाप की तरह ढोता रहा.

प्राचीन भारतीय साहित्य ऐसे अद्भुत प्रसंगों से भरा पड़ा है…tumblr_inline_mykpr0PqCJ1sui2lg

विचित्र चित्रकार

सत्रवीं शताब्दी में इटली के फ्लोरेंस शहर में आर्तेमीसिया जेंटिलेशी नामक एक महिला चित्रकार हुई.
यह सम्पूर्ण विश्व में आज तक हुई अपने आप में अकेली अनोखी चित्रकार है.

इस महिला चित्रकार ने कुल 27 चित्र बनाये. सभी अपने आप में अनोखे.
इन चित्रों में एक औरत पुरुष को बड़े ही हिंसात्मक तरीके से मारती पीटती चित्रित की गई है. पुरुष के बाल नोचना , डंडे से पीटना , छुरा घोंपना और सर में मोटी मोटी कील ठोकने जैसे दृश्य चित्रित किये गये हैं.

जिस भी हिंसात्मक तरीके से पुरुष को पीटा और अपमानित किया जा सकता है वो सब उसने चित्रित किया.

कहते हैं की उसके पिता के एक अधेड़ दोस्त ने उसका कम उम्र में ही बलात्कार कर दिया था. बलात्कार की अमानवीय पीड़ा और उसके बाद चले मुकद्दमे की बहसबाजी ने उसे तोड़ दिया. उसके मन में पुरुषों के प्रति असीम घृणा भर गई.

आर्तेमीसिया के चित्रों में पुरुषों के चेहरे तो भिन्न भिन्न हैं लेकिन उन्हें पीटती स्त्री का चेहरा एक ही है जो की उसकी स्वयं की शक्ल से मिलता जुलता है …1238378_573230779411463_721537512_n

आकाशगंगा

वर्षों पूर्व जब गर्मियों में छत पर सोने का रिवाज था तब आकाश की ओर ताकने पर उत्तर से दक्षिण की तरफ जाती एक दूधिया पट्टी दिखाई देती थी.

आज शायद प्रदूषण के कारण वो नहीं दिखती.
यह पट्टी हमारी आकाशगंगा का हमें दृश्यमान हिस्सा था.
आकाशगंगा चक्रीनुमा ऐसी ब्रह्मांडीय संरचना है जिसमे हमारे सौरमंडल जैसे करोड़ों सौरमंडल हैं.

जानकर बेहद आश्चर्य होता है की इस चक्रीनुमा संरचना को इसकी पूर्णता में देखने के लिये हमें इससे एक लाख प्रकाशवर्ष की दूरी चाहिये.
जबकि प्रकाश की गति 186000 मील प्रति सेकेंड है.
यही नहीं विज्ञान के अनुसार ऐसी अरबों आकाशगंगायें हमारे ब्रह्मांड में मौजूद हैं.
वास्तव में यह जगत और इसका रचयिता अनंत और अबूझ है…

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