Category Archives: पौराणिक इतिहास

वृन्दावन का निधिवन

भगवान् श्री कृष्ण की नगरी वृन्दावन का निधिवन अपने आप में अनोखा और रहस्यमय स्थल है.

दिन में यह स्थल भक्तों और पर्यटकों के लिए खुला रहता है लेकिन शाम होते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है.

रात्रि में इस वन में मनुष्य का रुकना मना है.

मान्यता है की रात्रि में भगवान् श्री कृष्ण श्री राधा रानी और अन्य गोपियों संग महारास रचाते हैं.

जिसने भी जिज्ञासावश चोरी छिपे रात्रि में इस वन में रुकने की कोशिश की वो या तो मारा गया या विक्षिप्त हो गया.

1240553_565906780143863_1598143584_nसंभवत: यहां रात्रि में कोई ऐसा दिव्य ऊर्जा क्षेत्र निर्मित होता है जिसके तेज को सह पाना साधारण मनुष्य के लिए संभव नहीं…

यक्ष

Yaksha_001यक्ष भारतीय मिथकीय योनियों जैसे की देव , नाग , किन्नर , प्रेत , गंधर्व , राक्षस आदि में से एक हैं.

पौराणिक साहित्य में इन्हें अर्ध देवयोनि कहा गया है.
देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर इनके राजा हैं.

यक्ष एक क्रूर और ह्रदयहीन योनि मानी जाती है.
मनुष्यों द्वारा इनका उपयोग अपने धन की रक्षा के लिए किया गया है.

प्राचीन समय में राजा महाराजा अपने खजाने की रक्षा के लिए यक्ष विशेष को पूजा द्वारा आमंत्रित कर खजाने की रक्षा का भार सौंप देते थे. इस प्रकार कीलित हुआ खजाना सदा सुरक्षित रहता था ऐसी मान्यता थी.

इसी विश्वास के चलते दिल्ली स्थित भारतीय रिजर्व बैंक के द्वार पर कंक नामक यक्ष और सहधर्मिणी यक्षिणी की प्रतिमा को स्थापित किया गया है…

यक्ष युधिष्ठिर संवाद

– ठहरोchairman-and-yudhisthira_2015418_16836_18_04_2015 जल पीने से पहले मेरे प्रश्नों के उत्तर दो ?

– आप कृपया मुझे यह बताईये की आप रूद्र , वसु अथवा मरुत आदि प्रधान देवताओं में से कौन हैं ?
– मैं यक्ष हूं. मैंने ही तुम्हारे तेजस्वी भाईयों की ये दशा की है. इन्होने मेरी अवहेलना की.
– क्षमा देव. आप आज्ञा करें. आपकी प्रसन्नता के लिये मैं क्या करूं ?
– मेरे प्रश्नो के उत्तर दें.
– जो आज्ञा.
– पृथ्वी से भारी क्या है ?
– माता.
– आकाश से ऊंचा कौन है ?
– पिता.
– पवन से भी अधिक तीव्रगामी कौन है ?
– मन.
– संख्या में तिनकों से अधिक क्या है ?
– चिंता.
– मृत्यु के समीप पुरुष का मित्र कौन है ?
– दान.
– धर्म यश स्वर्ग और सुख का मुख्य स्थान क्या है ?
– धर्म का मुख्य स्थान दक्षता है. यश का मुख्य स्थान दान , स्वर्ग का मुख्य स्थान सत्य है और सुख का मुख्य स्थान शील.
– मनुष्य की आत्मा क्या है ?
– पुत्र.
– जगत को किस वस्तु ने ढक रखा है ?
– अज्ञान ने.
– आलस्य क्या है ?
– अधर्म आलस्य है.
– सुखी कौन है ?
– जो ऋणी नहीं है.
– सच्चा स्नान क्या है ?
– जो मन का मैल धोये.
– काजल से भी अधिक काला क्या है ?
– कलंक.
– श्रेष्ठ धर्म क्या है ?
– दया श्रेष्ठ धर्म है.
– किसे वशीभूत करने से शोक नहीं होता ?
– मन.
– लज्जा क्या है ?
– निंदनीय कर्म से दूरी लज्जा है.
– दया क्या है ?
– सबके सुख की इच्छा दया है.
– राष्ट्र की मृत्यु का कारण क्या होता है ?
– अराजकता.
– ब्राह्मणत्व का प्रमाण क्या है ? कुल , चरित्र , शिक्षा या शास्त्र ज्ञान ?
– चरित्र ब्राह्मणत्व का प्रमाण है.
– धर्म तर्क या ऋषि विचारधारा दोनों में से किसमे है ?
– तर्क एवं विचारधाराओं में भिन्नता होती है. धर्म ह्रदय में होता है.
– आश्चर्य क्या है ?
– प्रत्येक नश्वर है परन्तु स्वयं के लिये नश्वर भाव नहीं रखता यही आश्चर्य है…

(महाभारत / वनपर्व)

अवतार

अजन्मा होने पर भी वह माया स्वरुप जन्मता प्रतीत होता है.
जब जब धर्म का क्षय और अधर्म का आधिपत्य बढ़ता है तब तब वह परम सत्ता अवतार लेता है.

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। vishnu-avatars-bhagavata-purana
अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।
(श्रीमदभगवद गीता 4 / 7)

परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम।
धर्मं संस्थापनार्थाय सम्भावामी युगे युगे।।
(श्रीमदभगवद गीता 4 / 8)

समय समय पर वह भिन्न भिन्न अवतार लेता है.
जैसे की –
नित्य अवतार – इस अवतार रूप में वह ज्ञानियों , सत्पुरुषों और महात्माओं के रूप में जनमानस में सदा उपस्थित रहता है. जैसे समाज में पाये जाने वाले साधु संत और महानात्मा.

अंशावतार – यहां अस्तित्व अपनी शक्ति के आंशिक रूप में प्रकट होता है. इस अवतार उद्देश्य में वह किसी एक महत कार्य को पूरा करता है. जैसे श्रीराम अवतार.

आवेशावतार – इस अवतार का प्रादुर्भाव भक्त को संकट से उबारने में होता है. भक्त की प्रार्थना , विश्वास और क्रंदन इस अवतार का सृजन करते हैं. जैसे नरसिंह अवतार.

पूर्णावतार – इसमें वह परम अपने पूर्ण वैभव के साथ प्रकट होता है. यह अवतरण दुष्टों के विनाश साधुओं की रक्षा और धर्म की स्थापना का परिचायक है. जैसे श्रीकृष्ण अवतार.

वह पूर्णब्रह्म कभी भी कहीं भी किसी भी रूप में अवतार ले सकता है. क्योंकि समस्त ब्रह्मांड उसी में व्याप्त है…

बटुक भैरव

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में एक पार्क है जिसका नाम है नेहरु पार्क. इस पार्क में बटुक भैरव का एक अति प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर के सम्बन्ध में मान्यता है की ये मंदिर पांडवों द्वारा निर्मित है. मंदिर की स्थापना के सन्दर्भ में एक बहुत ही रोचक कथा है.
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पांडवों को जब इन्द्रप्रस्थ का राज्य मिला तो वे हस्तिनापुर से इन्द्रप्रस्थ ( दिल्ली ) आ गए. अपने नए राज्य और दुर्ग की सुरक्षा हेतु पांडवों ने आपस में मंत्रणा कर निश्चय किया की काशी के कोतवाल भैरव महाराज की शरण में जाया जाए और उनसे इन्द्रप्रस्थ निवास का आग्रह किया जाए. महाबली भीम को ये जिम्मेदारी सौंपी गयी की किसी भी तरह अनुनय विनय करके वो भैरव महाराज को स्थाई रूप से निवास हेतु काशी से इन्द्रप्रस्थ लेकर आयें.

भीम काशी पहुंचे और भैरव महाराज से इन्द्रप्रस्थ की सुरक्षा हेतु निवेदन किया और साथ चलने का आग्रह करने लगे. लेकिन भैरव महाराज ने मना कर दिया. भीम द्वारा बहुत हाथ पैर जोड़ने पर भैरव महाराज मान गए और इन्द्रप्रस्थ चलने के लिए तैयार हो गए. परन्तु उन्होंने एक शर्त रख दी. भैरव महाराज भीम से बोले की मैं शिला रूप में तुम्हारे साथ चलूँगा और तुम्हें मुझे कंधे पर उठा कर ले जाना होगा. सम्पूर्ण यात्रा मार्ग में मेरा भूमि स्पर्श वर्जित होगा. यदि मार्ग में तुमने मुझे कंधे से उतारा तो मैं उसी स्थान पर स्थिर हो जाऊंगा. भीम ने शर्त स्वीकार कर ली.

भैरव महाराज शिला रूप में परिवर्तित हो गए और भीम ने उन्हें कंधे पर उठा लिया. धीरे धीरे सम्पूर्ण मार्ग निर्विघ्न तय हो गया और जब इन्द्रप्रस्थ दुर्ग मात्र आठ दस कोस दूर रह गया तो दैवयोग से भीम को भयानक प्यास ने आ घेरा. भीम प्यास से व्याकुल हो गए . उन्हें एक कुआं दिखाई दिया. भीम ने शिला को कंधे से उतार कर कुएं की मुंडेर पर रख दिया और कुएं से जल निकाल कर पीने लगे. प्यास बुझा कर भीम ने जब शिला को वापिस उठाना चाहा तो शिला टस से मस ना हुई. अब तो भीमसेन के छक्के छूट गए. भीम पछताते हुए बहुत रोये चिल्लाये तो भैरव महाराज प्रकट होकर बोले की मैं तो अब यहीं रहूँगा. तुम मेरी कुछ जटाएं दुर्ग में स्थापित कर देना इस प्रकार में वहां किलकारी भैरव रूप में स्थापित हो जाऊँगा. भीम को शिला के शीर्ष पर कुछ जटाएं दिखलाई पडीं. उसने वो जटाएं ली और भारी मन से दुर्ग की ओर प्रस्थान किया.

इसके उपरान्त पांडवों ने विधिपूर्वक दोनों मंदिरों की स्थापना की. नेहरु पार्क मंदिर में भैरव महाराज बटुक भैरव और पुराने किले मंदिर में किलकारी भैरव रूप में विराजमान हैं.

नेहरु पार्क मंदिर में बटुक भैरव कुएं के ऊपर स्थापित हैं. पौराणिक मान्यता है की कुएं पर स्थापित भैरव अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं. ये मंदिर अत्यंत जागृत और चमत्कारी मंदिर है. भक्त लोग भैरव महाराज को यहाँ उड़द की दाल के व्यंजन , ईमरती और मदिरा का भोग लगाते हैं…

 

 

डायोनीसस

माना जाता है की यूनानी मिथक डायोनीसस ने ही पहले पहल शराब बनाई.

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इन्हें शराब का देवता भी कहा जाता है.
इन्होने ही सर्वप्रथम अंगूरों से शराब बनाने की कला को संसार भर में फैलाया.

इनके स्वभाव में दोहरापन है. एक तरफ ये उल्लास और मस्ती का संचार करते हैं तो दूसरी तरफ इनमे क्रूरता , आवेश और उग्रता भी विद्यमान हैं.

कहा जाता है की ये किसी भी व्यक्ति को पागल कर सकते हैं.
इनका साथ इनके स्वभाव की दो विपरीतताओं को ही मनुष्य में परिलक्षित करता है.
उसके लिए बीच का कोई मार्ग ये नहीं छोड़ते…

गरुड़ पुराण / तिब्तेन बुक ऑफ़ डेड

तिब्बत संसार का एक मात्र देश है जहां व्यक्ति की मृत्यु निकट जान उसे परलोक के लिये प्रशिक्षित किया जाता है.
मरणासन्न व्यक्ति को क्रमवार वो स्थितियां बताई जाती हैं जिनका सामना वो मरने के बाद करेगा.

‘तिब्तेन बुक ऑफ़ डेड’ में जीव की मृत्योपरांत परलोक यात्रा और स्थितियों का रोमांचकारी विवरण है.

ऐसी ही एक किताब भारत में भी है जिसे ‘गरुड़ पुराण’ कहते हैं. इसमें भी जीव की मृत्योपरांत परलोक यात्रा का विवरण है. 1378530_568872623180612_874048128_n
‘गरुड़ पुराण’ को हिन्दू किसी संबंधी के देहांत के बाद मृतात्मा की शांति के लिए सुनते हैं. जबकि इसके पाठ का उद्देश्य जीवितों को सन्मार्ग पर चलाना है.

मृत्यु बाद जीव की परलोक संबंधी यात्रा और अनुभवों पर गहन शोध करने वाले पाश्चात्य विद्वान् रेमंड मूडी की ‘जीवन के बाद जीवन’ भी एक बहुत ही दिलचस्प पुस्तक है. इसमें उन सैंकड़ों लोगों के अनुभव संकलित हैं जो मरने के कुछ समय बाद पुन: जीवित हो गये थे.

परमहंस योगानंद जी की आत्मकथा ‘योगी कथामृत’ भी पारलौकिक जीवन और रहस्यों को आश्चर्यजनक ढ़ंग से उद्घाटित करती है…

इरावान / अरावन

महाभारत के एक प्रसंग के अनुसार पांडवों को विजय के लिए नरबली की आवश्यकता पड़ी. लेकिन स्वयं की बलि देने के लिए कोई भी प्रस्तुत नहीं हुआ.
संकट की इस घड़ी में अर्जुन की नाग पत्नी उलूपी का पुत्र इरावान स्वयं की बलि के लिए आगे आया.लेकिन इरावान की एक शर्त थी की वो विवाहित मरना चाहता था.
जिसे कल मर जाना है उससे कौन शादी करेगा. फलस्वरूप कोई कन्या उससे विवाह के लिए तैयार नहीं हुई.

ऐसे में भगवान् श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप बनाया और इरावान से विवाह कर उसके साथ रात बिताई.

भारत का हिजड़ा समुदाय इसी कथा को आत्मसात कर श्री कृष्ण के योनि संयोजन में स्वयं को देखता है और इरावान को अपना देवता और पति मानता है.

तमिलनाडु के वेल्लुपुरम जिले के कूवगम गांव में इरावान देवता का मंदिर है.
हर साल तमिल वर्ष की पहली पूर्णिमा को इस मंदिर में 18 दिवसीय कार्यक्रम मनाया जाता है. इसमें हजारों हिजड़ों द्वारा उनके देवता इरावान से विवाह किया जाता है. लेकिन अगले दिन ही मंगलसूत्र तोड़ और महाविलाप के बीच इरावान की प्रतिमा को भग्न कर हिजड़ों द्वारा विधवा वेश धारण कर लिया जाता है.

इरावान को अरावन भी कहते हैं. समस्त हिजड़े स्वयं को उसकी विधवा मानते हैं…

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हिडिंबा देवी मंदिर मनाली

पांडवों के वनवास के दौरान एक बार भीम की मुठभेड़ हिडिम्ब नामक राक्षस से हुई.
हिडिम्ब बहुत ही भयानक राक्षस था और मनुष्यों को मार कर खा जाना इसे बहुत पसंद था. ये अपने समय का अजेय राक्षस था.
इसकी बहन हिडिम्बा का प्रण था की जो उसके भाई को पराजित कर देगा उसी शूरवीर से वो विवाह करेगी.

महाबली भीम की हिडिम्ब से मुठभेड़ आज के हिमाचल प्रदेश के मनाली नामक स्थान पर हुई थी और भीम ने उसे मार गिराया था.

महाभारत अनुसार हिडिम्बा जो की एक मायावी राक्षसी थी भीम के साथ प्रणय सूत्र में बंधने पर भीम को आकाश मार्ग से बर्फ से ढकी पहाड़ी चोटियों , झरनों और फलों से लदे वृक्षों वाले अपने इलाके का आनंद पूर्वक भ्रमण कराती थी.

यह भौगोलिक स्थिति मनाली का सटीक वर्णन करती है.

मनाली में व्यास नदी के किनारे मां हिडिम्बा का अति प्राचीन मंदिर स्थित है. मनाली के मूल निवासी इन्हें अपनी कुलदेवी मानते हैं और बिना इनका आशीर्वाद लिए कोई भी शुभ काम नहीं करते…Hidimba