Category Archives: रत्न / Gemstones

सिट्रीन रत्न / Citrine और पेट विकार

एसिडिटी , गैस और अपच का मूल कारण पित्त का कुपित होना है.

पित्त का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है. पीड़ित अवस्था में यह गर्मी को कम या अधिक मात्रा में उत्सर्जित करने लगता है.

उत्तरकालामृत अनुसार भी बृहस्पति को पेट के रोगों का कारक माना गया है.

260218_504861179581757_1229327361_nऐसी स्थिति में सिट्रीन रत्न का प्रयोग रामबाण है. यह शरीर में पित्त को संतुलित कर देता है.
सिट्रीन की माला या ब्रेसलेट धारण करना इस समस्या का चमत्कारिक उपाय है…

स्फटिक / Quartz और माइग्रेन

जिन लोगों का लग्न अग्नि तत्व राशि हो और साथ ही अग्नि तत्व ग्रह भी लग्न में विराजमान हो तो ऐसे लोगों को माईग्रेन की समस्या रहती है.
इसका कारण है लग्न का दग्ध हो जाना.

इस स्थिति में स्फटिक रत्न की माला या ब्रेसलेट धारण करना उत्तम उपाय है.

शुद्ध स्फटिक धारण करने से शरीर की अनावश्यक गर्मी शांत हो जाती है और माईग्रेन से निश्चित छुटकारा मिल जाता है.
साथ ही गर्मी के मौसम में हो सके तो सोने के आभूषणों से बचें और चांदी धारण करें.

264464_505016356232906_1014691753_nजो लोग गले में सोने की चेन या हाथ में सोने का कड़ा , सोने की अंगूठियां आदि पहनने के आदि हों वो यदि गर्मी के मौसम में चांदी धारण करें तो सुखद एहसास प्राप्त करेंगे…

मूनस्टोन और ऑनेक्स अनिद्रा करें दूर

अनिद्रा आज एक आम समस्या है.

लोग सोने की कोशिश करते हैं और नींद नहीं आती.
इसका कारण है कफ़ नाड़ी का अवरुद्ध होना या समुचित रूप से ना चलना. यदि कफ़ नाड़ी को सम्यक चला लिया जाए तो अनिद्रा की समस्या ख़त्म हो जायेगी.

इसके लिए एक बहुत ही आसान उपाय है चंद्रकांत मणि और हरे सुलेमानी की माला या ब्रेसलेट धारण करना. इन्हें मून स्टोन और ग्रीन ऑनेक्स के नाम से भी जाना जाता है.

942936_505176296216912_1883515405_nइन दोनों को सम्मिलित रूप में धारण करना अनिद्रा के लिए बेजोड़ उपाय है.
इस उपाय को वे लोग भी निरापद रूप से प्रयोग कर सकते हैं जो मधुमेह रोगी हैं और कफ़ वर्धक खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं कर सकते…

यमनी हकीक और संगसितारा से वातरोग उपचार

वातविकार शनि का दुष्प्रभाव है.

इसमें शरीर में स्थित वायु कुपित हो जाती है.
शनि का दशांतर और गोचर में प्रतिकूल प्रभाव शारीरिक वायु को कुपित करता है. फलस्वरूप व्यक्ति बहुत कष्ट पाता है.

जोड़ों और शरीर में दर्द, पेट फूलना, भोजन से अरुचि, कब्ज, उत्साह हीनता, निराशा, आलस्य, अकर्मण्यता, अवसाद इस स्थिति के प्रमुख लक्षण हैं.

947024_505391672862041_1526179959_nऐसे में यमनी हकीक और शुद्ध संग सितारा की माला या ब्रेसलेट पहनने से उपरोक्त लक्षणों से मुक्ति मिलती है. इन रत्नों को ब्राउन अगेट और सन स्टोन के नाम से भी जाना जाता है…

नीली / Iolite कम करें मोटापा

मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए आयोलाईट जिसे नीली भी कहते हैं बहुत उपयोगी है.

इसे माला या ब्रेसलेट की तरह धारण करना शरीर की अनावश्यक चर्बी को कम कर धीरे धीरे शरीर को हल्का बना देता है.
लेकिन इसे धारण करने के लिए कुछ सावधानियां अपेक्षित हैं.

आयोलाईट एक तुरंत प्रतिक्रिया करने वाला रत्न है. किन्ही मामलों में कल्पनाशीलता और वैचारिक भटकाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

166029_505722746162267_312016157_nध्यान और पूजापाठ इस दौरान अतिआवश्यक हैं. तरल पदार्थों का अधिक सेवन आदर्श है.
बेहतर होगा की जन्म पत्रिका विवेचना उपरांत ही इस उपाय को किया जाए…

फिरोजा

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फिरोजा रत्न को शुक्र और शनि का मिश्रित रत्न माना जाता है. ज्योतिष में शुक्र और शनि की युति लैला मजनू की जोड़ी के नाम से प्रसिद्द है. फिरोजा मनवांछित प्रेम प्राप्ति, नजरबट्टू, खुशनुमा मिजाज और भोगविलास के लिए पहना जाता है. इसे बड़े आकार में पहनने का रिवाज है. इसकी उंगली अनामिका और धातु चांदी है.

ओपल

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ओपल शुक्र ग्रह का रत्न है. सुखों में कमी , पति पत्नी में वैमनस्य, विपरीत लिंगियों के प्रति उदासीनता, संतानहीनता, क्रोध, धन की कमी आदि लक्षणों में इसे पहनना चाहिये. इसे धारण करने से शुक्र को बल मिलता है. इसे चांदी में अनामिका में धारण किया जाता है.

 

लहसुनिया

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लहसुनिया केतु रत्न है. मुख्य रूप से यह कनकखेत, श्यामखेत और धूम्रखेत तीन प्रकार का उपलब्द्ध होता है. कुंडली विवेचना से इनमे से किस किस्म को धारण किया जाये इसका पता चलता है. मानसिक भटकाव, लक्ष्यहीनता, जिजीविषा में कमी आदि स्थितियों में इसका उपयोग आदर्श है. कुंडली विवेचना उपरांत ही इसकी धातु और उंगली का निर्धारण किया जाता है.

पन्ना

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पन्ने का स्वामी बुध है. पन्ना कनिष्ठिका उंगली में स्वर्ण में पहना जाता है. पन्ना आजीविका की कमी, याद्दाश्त में कमी, दिमागी कमजोरी, व्यवहारिकता में कमी और बुध की शुभता बढ़ाने के लिये धारण किया जाता है.

पुखराज

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पुखराज रत्न के अधिपति बृहस्पति देव हैं. बृहस्पति की शुभता को बल देने के लिये पुखराज को तर्जिनी उंगली में स्वर्ण मे पहना जाता है. इसके धारण करने से परिपक्वता, विनम्रता और विवेक में वृद्धि होती होती है.