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नाग पंचमी 2016

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है.

हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी के रुप में मनाया जाता है. इस दिन नागों और सर्पों को देवता मान उनकी पूजा की जाती है. नाग पंचमी के ही दिन गांवों कस्बों में मेले लगते हैं कुश्तियों और खेलकूद की प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है. इस दिन पशुओं को नदी तालाब आदि पर ले जाकर नहलाया धुलाया जाता है और उन्हें सजाया संवारा जाता है.

हमारी संस्कृति में पशु पक्षी, वृक्ष वनस्पति, नदी तालाब, चांद तारे सबके साथ आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न किया गया है. हमारे यहां गाय की पूजा होती है. बहनें कोकिला व्रत करती हैं, कोयल के दर्शन हो अथवा उसका स्वर कान पर पड़े तब ही भोजन करती हैं. वृषभोत्सव के दिन बैल का पूजन किया जाता है. वट सावित्री व्रत में बरगद की पूजा होती है. परन्तु नाग पंचमी जैसे दिन नाग का पूजन जब हम करते हैं तो संस्कृति की विशिष्टता पराकाष्ठा पर पहुंच जाती है.

नाग को देव के रूप में स्वीकार करने में हिन्दुओं के हृदय की विशालता का दर्शन होता है.
भारत देश कृषिप्रधान देश है सांप खेतों का रक्षण करता है इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं. चूहे और कीट आदि फसलों को नुक्सान पहुंचाने वाले तत्वों का नाश कर सांप खेतों को हरा भरा रखते हैं.
सांप हिन्दुओं के प्रधान देवता महादेव का आभूषण भी है इसलिए सम्मान का पात्र है. श्रावण मास वर्षाकाल है. वर्षाकाल में बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप अधिक मात्रा में यहां वहां दृष्टिगोचर होते हैं. ऐसे में नागपंचमी का पर्व यह सन्देश देता है की सर्प आदर का पात्र है उसे नुक्सान ना पहुंचाया जाए.

नाग पंचमी को लोग घर में दीवार को गेरू से पोत कर उस पर नाग की आकृति बनाकर उसका पूजन करते हैं. घर के मुख्यद्वार के दोनों तरफ भी पंचमुखी नाग के चित्र उकेरे जाते हैं जो की उनके रक्षक होने का सूचक है.
कुछ लोग वनों में जाकर सांप की बांबियों पर दूध, चावल और सुगन्ध आदि अर्पित कर उनका पूजन करते हैं. इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व 7 अगस्त को है.