हिन्दुओं में प्रचलित धारणाएं जो हिंदुत्व हैं ही नहीं

1. भगवान से डरना – सनातन में भगवान से डरने जैसी कोई बात है ही नहीं. सनातन अवधारणा कण कण में ईश्वर का अस्तित्व मानती है और विश्वास करती है की ऐसा कुछ भी नहीं जिसमे ईश्वर ना हो. ऐसे में ईश्वर से डरना बेमानी है क्योंकि ईश्वर कोई अलग अस्तित्व नहीं है बल्कि जो कुछ भी है वह ईश्वर है. श्रीकृष्ण ने इस बात को गीता में बहुत अच्छी तरह परिभाषित किया है. ईश्वर से डरना ईसाई और इस्लामिक धारणाएं हैं. ईसाईयत में तो मनुष्य को जन्मजात पापी माना गया है.

2. किसी की मृत्यु पर शोक सन्देश में RIP (Rest In Peace) लिखना भी हिन्दू मान्यता नहीं है. यह ईसाई, इस्लाम और यहूदी जैसे एक ही जन्म को मानने वाले धर्मों की मान्यता है. इन धर्मों में माना जाता है की मनुष्य का केवल एक ही जन्म होता है और मृत्यु के बाद कयामत के दिन तक व्यक्ति को कब्र में अपने फैसले के लिए इन्तजार करना पड़ता है. जबकि सनातन पुनर्जन्म में विश्वास रखता है और मृत्यु उपरान्त जीव की प्रेत, स्वर्ग, नर्क, पुनर्जन्म अथवा मोक्ष स्थिति की चर्चा करता है. किसी की मृत्यु उपरान्त दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी जाती है और उसकी सद्गति (मोक्ष) की कामना की जाती है.

3. हिंदुत्व में जो कुछ भी पौराणिक है वह इतिहास है. इस मान्यता में मिथक जैसा कुछ नहीं होता. राम, कृष्ण, देवी देवता, ऋषि मुनि, राक्षस, दानव सब इतिहास हैं ना की काल्पनिक मिथक. जबकि पश्चिमी देवी देवता मिथक कहलाते हैं और क्योंकि उनमें कल्पना का समावेश होता है.

4. हिंदुत्व में मूर्ति पूजा किसी प्रतिमा या छवि की पूजा नहीं है ना ही यह प्रतीकों की पूजा है. देव प्रतिमा को विग्रह कहा गया है. विग्रह का अर्थ होता है फैलाना, यह उस देवी देवता का विस्तार है जिसे हम पूजना चाहते हैं. देवी देवता के उस विस्तार को जिसे हम देख पाते हैं विग्रह कहलाता है.

5. श्री हनुमान और श्री गणेश जैसे देवताओं को अंग्रेजी अनुवाद में मंकी गॉड और एलिफैंट गॉड कहना बहुत गलत बात है. यह अनुवाद इन श्रद्धा चरित्रों से न्याय नहीं करता इससे बचना चाहिए. इसकी जगह इनके श्री युक्त नाम ही प्रयोग करने चाहिए.

6. हिन्दुओं के मंदिर प्रार्थना भवन या prayer Hall नहीं हैं. वहां पूजा की जाती है और आशीष मांगे जाते हैं. प्रार्थना करना सनातन शैली नहीं है इसके बदले हिन्दू भगवान से आशीष मांगता है. बड़े बुजुर्ग और गुरुजन भी छोटों को आशीष ही देते हैं. हिन्दू अपने मंदिर से कभी खाली हाथ भी नहीं आता मंदिर छोटा हो या बड़ा वह भगवान का चरणामृत और प्रसाद जरूर पाता है.

7. हिन्दुओं में त्यौहार और उत्सव दीप जलाकर मनाये जाते हैं मोमबत्ती बुझा कर नहीं. सनातन ने अग्नि को भी देवता माना है और उसे फूंक मारकर बुझाना अशिष्टता है. तमसो मा ज्योतिर्गमय का उद्घोष हिंदुत्व की विशेषता है.

8. हिंदुत्व धार्मिकता और भौतिकता की बात भी नहीं करता क्योंकि वह सभी कुछ दिव्य मानता है. अंग्रेजी के Religion, Religious और Materialistic जैसे शब्दों का हिंदुत्व में कोई स्थान नहीं है. धर्म हिंदुत्व में व्यक्तिगत बात है और धार्मिकता जैसा कुछ नहीं होता. धर्म को सनातन में कर्तव्य भी कहा गया है. आज जिसे धर्म कहा जाता है सनातन उसे सम्प्रदाय कहता है. सनातन ऋषि मुनियों ने आत्मा के सन्दर्भ में अध्यात्म का जिक्र किया है जिसका अर्थ होता है स्वयं का अध्ययन.

9. अंग्रेजी शब्द Sin जिसका अर्थ पाप किया जाता है वह भी सनातन द्वारा वर्णित पाप शब्द का सही अर्थ स्पष्ट नहीं करता. सनातन में पूरा जोर धर्म के संपादन पर है. धर्म का अर्थ है देश, काल और परिस्थिति अनुसार सम्पादित किया गया सम्यक कर्म इसे कर्तव्य भी कहा गया है. जो भी धर्म नहीं है वह अधर्म है और अधर्म पाप का जनक है. इसके अलावा ग्लानि को भी पाप का परिणाम माना गया है.

10. सनातन के योग का अर्थ शारीरिक व्यायाम नहीं है जैसा की अंग्रेजी अर्थ Yoga में समझा जाता है. योग का अर्थ है मन का आत्मा से जुड़ाव. योग के प्रणेता ऋषि पतंजलि का सूत्र है ‘योगश्च चित्तवृत्ति निरोध: यानि योग चित्त की वृत्तियों को रोकता है. चित्तवृत्ति मन के कार्यव्यापार को कहते हैं. योग इस कार्यव्यवहार के ठहराव में सहायक है. ऐसे ही ध्यान का अंग्रेजी अनुवाद Meditation भी गलत है क्योंकि Meditation का अर्थ है आराम पाना. यह अंग्रेजी शब्द Medicine से निकला है जबकि ध्यान का अर्थ है कुछ ना होना, ध्यान कुछ करना नहीं बल्कि होना है मात्र होना. यह भाव और मन के पार की स्थिति है. इसे मात्र आराम देने वाला मानना हास्यास्पद है.