शाप और वरदान

जिन्दगी अजीब है

यहां वरदान शाप में बदल जाते हैं और शाप वरदान में.
राजा दशरथ तीन विवाह करने के उपरांत भी नि:संतान थे.
बूढ़े भी हो चले थे.

एक दिन अचानक शिकार खेलते उनके हाथो श्रवण कुमार मारा गया.
पुत्र शोक से व्याकुल श्रवण कुमार के माता पिता ने राजा दशरथ को शाप दे दिया की तुम भी हमारी तरह पुत्र वियोग में तड़प तड़प कर मरोगे.

यह शाप राजा के लिए मानो वरदान बन कर आया. अब पुत्र वियोग में मरने के लिए पुत्र तो चाहिए ही.
कालांतर में उन्हें चार पुत्रों की प्राप्ति हुई.

ऐसे ही कैकेई को राजा दशरथ से मिले दो वरदान कब अभिशाप में बदल गये उसे पता ही नहीं चला.
जब पता चला तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

अप्सरा उर्वशी के प्रणय निवेदन को ठुकरा अर्जुन उसके द्वारा दिये शाप का शिकार हो गया. उसे एक वर्ष की नपुंसकता का शाप मिला.
अर्जुन को मिला यह शाप पांडवों के लिये महा वरदान सरीखा था.
क्योंकि एकमात्र अर्जुन ही ऐसा था जिसे अज्ञातवास में स्वयं को छिपाना सबसे मुश्किल था.
इस शाप के फलस्वरूप अर्जुन बृहन्नला बन स्वयं को छिपाने में सफल रहा.

ऐसे ही ऋषि दुर्वासा द्वारा कुंती को दिया इच्छित देवता दर्शन वरदान कर्ण के रूप में उसके लिये अभिशाप बन गया. वह जीवन भर इस वरदान के कारण तिल तिल मरती रही.

भीष्म को पिता से मिला इच्छा मृत्यु वरदान भी उनके गले की फांस बन गया.
इस वरदान स्वरुप उनसे ना उगलते बनता था ना निगलते.
पूरा जीवन यह महारथी अमरत्व के वरदान को एक शाप की तरह ढोता रहा.

प्राचीन भारतीय साहित्य ऐसे अद्भुत प्रसंगों से भरा पड़ा है…tumblr_inline_mykpr0PqCJ1sui2lg