त्यौहार ना मनाने का ज्योतिषीय कारण

ज्योतिष अनेक प्रकार के पूर्व ऋणों की चर्चा करता है और इनमें से एक है स्व: ऋण.
कुंडली के पंचम भाव में यदि शुक्र, शनि, राहु और केतु में से कोई अकेले विराजमान हो तो स्व: ऋण होता है.
इस ऋण के कारण जातक त्यौहार और खुशियां मनाने से परहेज करता है. उसे अपने परंपरागत रीति रिवाज मानने में भी पीड़ा होती है.

अपनी परम्पराओं का निरादर कर वह विजातीय धर्मों और रीतिरिवाजों में रूचि और सहानुभूति रखता है.
त्यौहार ना मनाने के लिए वह अनेक तर्क देता है और दूसरों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करता है.
अपनी अंतरात्मा को कुचलना इस ऋण का कारण माना गया है.
जो लोग अपने विवेक और अंतरात्मा को लगातार मारते रहते हैं वे इस ऋण के शिकार हो जाते हैं.