ज्योतिष में विभिन्न समयकाल

होराकाल – अहोरात्र शब्द से होरा शब्द की उत्पत्ति हुई है. होरा का मान एक घंटे का समय है, और यह समय ग्रहों द्वारा निर्धारित होता है. दिन और रात मिलकर कुल 24 होरा होते हैं. जिस दिन जो वार होता है उस दिन सूर्योदय के पश्चात एक घंटे का समय उस वार के अधिपति ग्रह का होता है. यह उस ग्रह का होरा कहलाता है. इसके बाद वाला एक घंटे का होरा उस वार से छठे वार स्वामी का होता है और यह क्रम इसी प्रकार चलता रहता है. सभी मुहूर्तों में होरा मुहूर्त श्रेष्ठ माना गया है.

प्रात:काल – प्रतिदिन सूर्योदय से 48 मिनट पूर्व तक का समय प्रात:काल कहा जाता है. सामान्य व्यक्ति के लिए नींद से जागने का यह आदर्श समय है.

अरुणोदयकाल – सूर्योदय से 1 घंटा 12 मिनट तक का समय अरुणोदय काल होता है. आकाश में लालिमा दृष्टिगोचर होने लगती है.

उषाकाल – सूर्योदय से 2 घंटे पूर्व तक का समय उषाकाल कहलाता है. इस समय का भ्रमण उषापान कहलाता है जो की स्वास्थ्य के लिए परम हितकारी माना गया है.

अभिजितकाल – दोपहर 11 : 36 बजे से 12 :24 बजे तक का समय अभिजितकाल कहलाता है. लेकिन बुधवार को वर्जित होता है.

प्रदोषकाल – सूर्यास्त के 48 मिनट बाद तक का समय प्रदोषकाल कहलाता है.

गौधूलिकाल – सूर्यास्त से 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद तक समय गौधूलिकाल कहलाता है.

राहुकाल – प्रतिदिन 1.5 घंटे का समय राहुकाल कहलाता है. प्रत्येक वार को यह अलग समय पर नियत है जो की इस प्रकार है – रविवार 16 : 30 से 18 : 00, सोमवार 07 : 30 से 09 : 00, मंगलवार 15 : 00 से 16 : 30, बुधवार 12 : 00 से 13 : 30, बृहस्पतिवार 13 : 30 से 15 : 00, शुक्रवार 10 : 30 से 12 : 00 और शनिवार 09 : 00 से 10 : 30 तक.

गुलिककाल – प्रतिदिन 1.5 घंटे का समय गुलिककाल होता है जो इस प्रकार है – रविवार 15 : 00 से 16 : 30, सोमवार 13 : 30 से 15 : 00, मंगलवार 12 : 00 से 13 : 30, बुधवार 10 : 30 से 12 : 00, बृहस्पतिवार 09 : 00 से 10 : 30, शुक्रवार 07 : 30 से 09 : 00 और शनिवार 06 : 00 से 07 : 30 तक.

यमगण्डकाल – प्रतिदिन 1.5 घंटे का समय यमगण्डकाल होता है जो इस प्रकार है – रविवार 12 : 00 से 13 : 30, सोमवार 10 : 30 से 12 : 00, मंगलवार 09 : 00 से 10 : 30, बुधवार 07 : 30 से 09 : 00, बृहस्पतिवार 06 : 00 से 07 : 30, शुक्रवार 15 : 00 से 16 : 30 और शनिवार 13 : 30 से 15 : 00 तक.