गुरु नानक जयंती

गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा को पाकिस्तान के तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था. आज यह स्थान उनके सम्मान में ननकाना साहिब कहलाता है. गुरु नानक सिक्खों के आदि गुरु हैं.
गुरु नानक का व्यक्तित्व असाधारण था. उनमें पैगम्बर, दार्शनिक, राजयोगी, गृहस्थ, त्यागी, धर्मसुधारक, समाज-सुधारक, कवि, संगीतज्ञ, देशभक्त, विश्वबन्धु सभी के गुण उत्कृष्ट मात्रा में विद्यमान थे. उनमें विचार शक्ति और क्रिया शक्ति का अपूर्व सामंजस्य था. उन्होंने पूरे देश की यात्रा के साथ ही विदेशी यात्राएं भी कीं और लोगों पर उनके विचारों का असाधारण प्रभाव पड़ा. उनमें सभी गुण मौजूद थे. पैगंबर, दार्शनिक, राजयोगी, गृहस्थ, त्यागी, धर्मसुधारक, कवि, संगीतज्ञ, देशभक्त, विश्वबंधु आदि सभी गुण जैसे एक व्यक्ति में सिमटकर आ गए थे. उनकी रचना ‘जपुजी’ का सिक्खों के लिए वही महत्व है जो हिंदुओं के लिए गीता का है.
गुरुनानक देव जी ने अपने अनु‍यायियों को दस अतिमहत्वपूर्ण शिक्षाएं दीं –

1. ईश्वर एक है.
2. सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो.
3. ईश्वर सब जगह और सभी प्राणी मात्र में मौजूद है.
4. ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता.
5. ईमानदारी से और मेहनत कर के उदरपूर्ति करनी चाहिए.
6. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं.
7. सदैव प्रसन्न रहना चाहिए. ईश्वर से सदा अपने लिए क्षमा मांगनी चाहिए.
8. मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से ज़रूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए.
9. सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं.
10. भोजन शरीर को ज़िंदा रखने के लिए ज़रूरी है पर लोभ लालच व संग्रहवृत्ति बुरी है.

इस वर्ष यह पर्व 14 नवंबर को है.guru-nanak-jayanti2