किसने निकाला था भारत की आजादी का मुहूर्त

देश के नियंताओं ने देश की आजादी के लिये 15 अगस्त 1947 की शुरुआत यानी अर्धरात्रि को चुना.
क्योंकि इसके पीछे उनकी ज्योतिष के प्रति गहन आस्था थी.
उज्जैन के तत्कालीन महान ज्योतिषी पद्म भूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास ने इस मुहूर्त को चुना था.
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद व्यास जी के बड़े भक्त थे. अंग्रेजों ने भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता के लिए 14 और 15 अगस्त की दो तारीखें तय की थीं. इन्हीं तारीखों में से दोनों ने अपना समय चुनना था.
दिलचस्प बात ये है की व्यास जी ने 1938 में ही अपने एक ज्योतिषीय लेख में भारत की स्वतंत्रता तिथी 15 अगस्त 1947 घोषित कर दी थी.
उनके अनुसार यह मुहूर्त स्थिर लग्न में था जिसके कारण भारत का लोकतंत्र सदा स्थिर रहेगा और आने वाले वर्षों में यह राष्ट्र विश्व का सिरमौर बनेगा.

व्यास जी ने गांधी वध भी 1924 में ही घोषित कर दिया था. उन्होंने एक लेख में लिखा था गांधी की स्वाभाविक मृत्यु नही होगी वे मारे जायेंगे उनकी हत्या एक ब्राह्मण करेगा.
ऐसे ही नेहरू का भी तमाम भविष्य व्यास जी ने खोलकर रख दिया था और वे कितने साल राज करेंगे यह भी आजादी से पहले ही बता दिया था तब नेहरू का कद बहुत छोटा था और लोगों को एकाएक इस बात पर विशवास नहीं हुआ था.
नेहरू भी व्यास जी से परामर्श लिया करता था लेकिन इस बात को छिपाया जाता था क्योंकि नेहरू ने अपनी छवि एक सेक्युलर की बना रखी थी.

लाल बहादुर शास्त्री द्वारा अमावस्या के दिन प्रधानमन्त्री पद की शपथ लेने को भी व्यास जी ने बहुत गलत बताया था.
शास्त्री जी भी व्यास जी को बहुत मानते थे पर उन्होंने बात हंसी में उड़ा दी. शास्त्री जी जब ताशकंद जाने लगे तब पंडित सूर्यनारायण व्यास जी ने ‘हिंदी हिंदुस्तान’ में एक लेख लिखा की शास्त्री जी ताशकंद से जीवित नहीं लौटेंगे. संपादक ने यह लेख छपने से रोक लिया और शास्त्री जी तक यह अनहोनी पहुंचाई.
शास्त्री जी बात को टाल गए. ताशकंद में शास्त्री जी की मृत्यु के बाद अखबार ने इस टिप्पणी के साथ लेख छापा की यह लेख उन्हें शास्त्री जी की मृत्यु से पहले ही मिल चुका था.

मोरारजी देसाई के बारे में प्रचारित था की वह ज्योतिष पर बिलकुल विशवास नहीं करते लेकिन उन्होंने भी बंबई राज्य की स्थापना का मुहूर्त व्यास जी से निकलवाया था.
पंडित सूर्यनारायण व्यास जी से इंदिरा गांधी ने भी ज्योतिषीय परामर्श लिया था. व्यास जी ने इंदिरा गांधी और उनके दोनों पुत्रों की अप्राकृतिक मृत्यु के विषय में भी बता दिया था लेकिन इस बात को दफन कर दिया गया.

1936 में ब्रिटिश सम्राट एडवर्ड अष्टम की भारत यात्रा अफवाहों पर भी व्यास जी ने स्पष्ट भविष्यवाणी कर दी थी की वे भारत नहीं आएंगे और उनकी गद्दी के दिन अब गिने चुने हैं.
ऐसा ही हुआ सम्राट भारत नहीं आये और कुछ ही दिन बाद एक अमेरिकन महिला लेडी सिम्पसन से विवाह करने से उठे विवाद में सम्राट को सिंहासन छोड़ना पड़ा. इतना ही नहीं हिटलर भी व्यास जी का भक्त था और उनसे ज्योतिषीय परामर्श लेता था…

10408720_726193930781813_6808347471697621866_n