इंदु लग्न / आर्थिक स्थिति का आकलन

strong_handsज्योतिष में व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का आकलन करने की अनेक विधियां हैं.

इन्हीं में से एक विधि है इंदु लग्न.
चंद्रमा को लग्नवत माना जाता है और चंद्रमा धन समृद्धि का कारक ग्रह है. इंदु शब्द चंद्रमा का ही पर्यायवाची है इसीलिये इसे विशेष चंद्र योग भी कहा जाता है.

इंदु लग्न द्वारा व्यक्ति की आर्थिक स्थिति ही नहीं बल्कि यह भी जाना जा सकता है की धन प्रदाता ग्रह कौनसे हैं. साथ ही इस बात की भी जानकारी मिलती है की धन का स्रोत किस प्रकृति का होगा. किन दशान्तरों में धन प्राप्ति के विशेष अवसर मिलेंगे और बैंक बैलेंस की स्थिति क्या रहेगी.

इंदु लग्न की गणना में राहु केतु को शामिल नहीं किया जाता लेकिन इंदु लग्न निश्चित हो जाने पर उनकी भूमिका अन्य ग्रहों की ही भांति विचारणीय होती है.

गणना के लिए राहु केतु को छोड़कर शेष सात ग्रहों की कलाएं निश्चित की गई हैं.

ग्रह
सूर्य चंद्रमा मंगल बुधबृहस्पतिशुक्रशनि
कला 30166810121

गणना करने का तरीका इस प्रकार है –

जन्म लग्न से नवमेश और जन्म चंद्रमा से नवमेश की कलाओं का योग करें.
इस योग को 12 से भाग दे दें. जो शेषफल आये उसे जन्म चंद्रमा से उतने ही भाव गिन लें. मान लीजिये यदि शेषफल 4 आता है और जन्म चंद्रमा चतुर्थ भाव में बैठा है तो वहां से 4 गिनने पर सप्तम भाव इंदु लग्न निश्चित होगा.

यदि कलाओं का योग 12 से कम है तो चंद्रमा से उतने ही भाव आगे गिनने पर जो भाव आयेगा वह इंदु लग्न होगा. यदि शेषफल 0 रहता है तो जन्म चंद्रमा का भाव ही इंदु लग्न माना जायेगा.

इंदु लग्न निश्चित हुए भाव में ग्रहों की स्थिति और इस पर ग्रहों की दृष्टि एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है. इस लग्न के लग्नेश, द्वितियेश, एकादशेश, पंचमेश, भाग्येश आदि के साथ ही बनने वाले अन्य योग व्यक्ति की सुख समृद्धि और आर्थिक स्थिति का सटीक पता देते हैं.